विकलांगता – परिचय, परिभाषा, अंतर, प्रकार, उदाहरण

विकलांगता – परिचय

विकलांगता शारीरिक संज्ञानात्मक, मानसिक, संवेदी, संज्ञानात्मक विकासत्मक या इनमें से कुछ का संयोजन हो सकती है | विकलांगता जन्म से मौजूद हो सकती है या किसी व्यक्ति के जीवनकाल में हो सकती है |

विकलांगता एक ऐसा शब्द है, जिसमे हानि (Impairment) गतिविधियों के होने में रुकावट, और भागीदारी में रुकावट या प्रतिबन्ध शामिल होता है | एक हानि (Impairment) शरीर के कार्य या संरचना में एक समस्या है: एक गतिविधि सीमा या रुकावट किसी कार्य या क्रिया को निष्पादित करने में, किसी व्यक्ति द्वारा सामना (महसूस) की जाने वाले कठिनाई है; जबकि भागीदारी प्रतिबन्ध एक व्यक्ति द्वारा जीवन स्थितियों में शामिल होने में अनुभव की जाने वाली समस्या है |

इस प्रकार विकलांगता एक जटिल स्थिति है, जो किसी व्यक्ति की विशेषताओं, उसके शरीर और समाज की विशेषताओं के बिच एक अंत क्रिया को दर्शाती है, जिसमे वह रहता है |

एक व्यक्ति विकलांग के रूप में अर्हता प्राप्त करता है, यही उसे अतीत में कोई क्षति (impairment) हुई है या व्यक्तिगत या समूह मानक या मानदंडो के आधार पर अक्षय के रूप में देखा जाता है | इस तरह की हानि में, शारीरिक, संवेदी और संज्ञानात्मक या विकासात्मक विकलांगता शामिल होती है | मानसिक विकार (मानसिक रोग या मनोसामाजिक विकलांगता के रूप में जाना जाता है) और विभिन्न प्रकार की दीर्घकालिक के रूप में जाने जाता है |

विकलांगता क्या है ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (2020) विकलांगता शरीरी या मस्तिष्क की (हानि) एक स्थिति है जिसमे व्यक्ति को कुछ क्रियायें (क्रियायें करने में बाधा) करने में मुश्किल होती है और वह अपने आस-पास के वातावरण से समन्वय (भागीदारी प्रतिबन्धता) नहीं कर पाता है |

 विकलांगता कई प्रकार की होती है, जो व्यक्ति को प्रभावित करती है |

  • दृष्टि
  • गति
  • चिंतन
  • सीखना
  • संचार करना
  • श्रवण
  • मानसिक स्वास्थ्य
  • सामाजिक संबंध

यद्यपि “विकलांग व्यक्ति” को कभी-कभी जरूरतों की एक विस्तृत श्रृंखला वाले लोगो के विविध समूह के रूप में उल्लेख किया जाता है | एक ही प्रकार की क्षमता वाले दो व्यक्ति बहुत विभिन्न तरीको से प्रभावित हो सकते है | कुछ विक्लान्ग्ताये छिपी हुई या दिखाई नहीं देती है |

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विकलांगता के तीन आयाम है :

  1. हानि- व्यक्ति की संरचना या शरीर के कार्य या मानसिक कार्यप्रणाली में हानि या कमी है | उदाहरण के लिए अंग की क्षति दृष्टि की क्षति या स्मृति की क्षति शामिल है |
  2. गतिविधि करने की सीमा जैसे देखने, सुनने, करने, चलने या समस्या समाधान में समस्या
  3. भागीदारी प्रतिबन्धता- सामान्य रोजमर्रा के कामो में रुकावट होना, जैसे काम करना, सामाजिक और मनोरंजक गति विधियों में शामिल होना, और स्वास्थ्य देखभाल और निवारक सेवाएं प्राप्त करना |
    विकलांगता दो स्थितियों के कारण हो सकती है जो जन्म के समय मौजूद होती है और यह जीवन में बाद के कार्यो को प्रभावित कर सकती है | इनमे संज्ञान (स्मृति, सीखना और समझना) गतिशीलता (अपने वातावरण में विचरण करना) श्रवण दृष्टि, व्यव्हार और दुसरे क्षेत्र प्रभावित हो सकते है | विकलांगता का स्टार को रेंज हल्का (Mild) Moderate (मध्यम) Severe (गंभीर) या Profound (अति गंभीर) हो सकती है | एक व्यक्ति में कई प्रकार की विकलांगता भी हो सकती है | चिकित्सीय समुदाय द्वारा विक्लान्ग्र के कारणों की स्थितियों को इस प्रकार वर्गीकृत किया है :-
  • अनुवांशिक (आनुवंशिक रूप से प्रेषित) – Genetically Transmitted
  • एकल गुणसूत्र (Singlegene) में विकार (उदाहरण के लिए दुचेन मस्कुलर डिस्ट्राफी)
  • गुणसूत्रों के विकार (उदाहरण के लिए डाउन सिंड्रोम)
  • गर्भावस्था के दौरान मान के संक्रमण (उदाहरण के लिए रूबेला) या पदार्थो, जैसे शराब या सिगरेट के संपर्क में आने के परिणाम स्वरूप|
  • अधिग्रहित (Acquired) जैसे बीमारी या चोट या अज्ञात कारण से होने वाली स्थितिया|
  • विकासात्मक स्थितियों से सम्बंधित जो बचपन के दौरान दिखाई पड़ती है (जैसे, आटिज्म स्पेक्ट्रम विकार और ध्यान की कमी/अतिउच्छलता (Hyperactivity) विकार |

क्षति क्या है ?

  • किसी व्यक्ति के शारीर की संरचना या कार्य या मानसिक कार्यप्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर या कमी क्षति है | उदाहरण के लिए, मस्तिष्क की संरचना में समस्याओं के परिणामस्वरुप मानसिक कार्यो को करने में कठिनाई हो सकती है, या आँखों या कानो की रचना में कमी के कारण समस्याएं हो सकती है |
  • संज्ञानात्मक दोष- शरीर के आंतरिक या बाहरी घटक के साथ महत्वपूर्ण समस्याएं है, उदाहरण के लिए एक प्रकार की वन्त्रिका क्षति, जिसके परिणाम स्वरुप मल्टीपल स्केलेरोसिस या शरीर के अंगों में कमी हो सकती है |
  • कार्यात्मक हानि- इसमें शरीर के अंग के कार्य का पूर्ण या आंशिक नुकसान शामिल है, उदाहरण के लिए दर्द जो कभी जाता नहीं है और जोड़ों का दर्द जिसमे चलना मुश्किल होता है |

गतिविधि सीमा और भागीदारी प्रतिबन्ध के बिच क्या अंतर है :-

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2001 में कार्य, विकलांगता और स्वास्थ्य (ICF) का अंतराष्ट्रीय वर्गीकरण प्रकाशित किया ICF हमारे आसपास की दुनिया में शारीर के कार्य और संरचना, गतिविधि, भागीदारी का स्तर और विभिन्न स्थितियों को वर्गीकृत करने के लिए एक मानक भाषा प्रदान करता है | यह व्याख्या स्वास्थ्य, कार्य प्रणाली, गतिविधियों और कारको जो लोगो को समाज में पूरी तरह से भाग लेने में मदद करते है या बाधा उत्पन्न करते है, का आकलन करने में मदद करती है |

आइसीएफ़ के अनुसार:-
गतिविधि- किसी व्यक्ति द्वारा किसी कार्य या क्रिया कर निष्पादन है |
भागीदारी- जीवन की विभिन्न स्थितियों में एक व्यक्ति की भागीदारी है |

आइसीएफ़ ने यह स्वीकार किया है की इन दोनों श्रेणियों की बिच अंतर कुछ अस्पष्ट है, इन्हें जोड़ते है यद्यपि मूलरूप से गतिविधियाँ व्यक्तिगत स्टार पर होती है और भागीदारी में जीवन की भूमिकाओं जैसे रोजगार, शिक्षा, या आपस में संबंध से जुड़ाव शामिल है | गतिविधि की सीमाओं और भागीदारी प्रतिबंधों का एक व्यक्ति के कार्यो को करने और सामाजिक भूमिकाओं में शामिल होने में कठिनाईयों का अनुभव करता है | क्रियाकलाप और भागीदारी, वातावरणीय कारको के कारण आसन और मुश्किल हो सकती है |

आइसीएफ़ ने निम्न को क्रियाकलाप और भागीदारी की श्रेणी में शामिल किया है –

  • कार्य को सीखना और सीखे ज्ञान को लागू करना (Applying Knowledge)
  • मांग और कार्य का प्रबंधन
  • गतिशीलता (शरीर को गतिशील बनाना और उस स्थिति को बनाये रखना, वस्तुओं को उठाना और संभाल पाना, वातावरण में घूमना, परिवहन का प्रयोग करके घूमना)
  • स्व-देखभाल कार्यो का प्रबंधन
  • घरेलु जीवन के कार्यो का प्रबंधन
  • पारस्परिक संबंधो और अंतःक्रियाओ की स्थापना और प्रबंधन
  • जीवन के मुख्य क्षेत्रो (शिक्षा, रोजगार, धन या वित का प्रबंधन) में शामिल होना
  • समुदाय, समाज और नागरिक जीवन में सलंग्न होना
  • क्रियाकलाप सीमाओं और भागीदारी

समुदाय में सुविधाये प्रदान कर क्रियाकलाप सीमाओं और भागीदारी प्रतिबंधो को कम या समाप्त करना महत्वपूर्ण है, ताकि वे रोजमर्रा की जीवन की भूमिकाओं और गतिविधियों में भाग ले सके | “Impairment”, “Disablity”, और “Handicap” इन शब्दों को अक्सर एक दुसरे के स्थान पर प्रयोग किया जाता है | इनका अर्थ यद्यपि काफी अलग है | तंत्रिका संबंधी चोट के विकास पर प्रभाव को समझने के लिए इनके अर्थ की विभिन्नता को समझना आवश्यक है | इनकी सबसे उद्धृत (Cited) परिभाषा विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा दी गयी है | Impairment (क्षति) और Disability (विकलांगता) को हम ऊपर समझ चुके है | अतः अपंगता (Handicap): किसी व्यक्ति के लिए हानि जो सामान्य भूमिका की पूर्ति को सिमित करता है, या रोकता है | जैसा की, पराम्परागत रूप से कहा जाता है | क्षति: शरीर की संरचना या अंग के साथ एक समस्या का उल्लेख करती है | विकलांगता- एक विशेष गतिविधि के संबंध में एक कार्यात्मक सीमा है और अपंगता एक सहकर्मी समूह (Peer Group) के सापेक्ष जीवन में एक भूमिका को निभाने में एक नुकसान को संदर्भित करता है |

Impairment, Disability और Handicap पदो के अंतर की इस उदाहरण द्वारा समझा जा सकता है |

मस्तिष्क पक्षाघात (Cerebral Paley) उदाहरण –

मोहन को एक प्रकार का मस्तिष्क पक्षाघात (CP) है जिसे स्पास्टिक डिपलिजिया कहा जाता है | मोहन के मस्तिष्क पक्षाघात के करण उसके पैर कड़े तंग, और गति में मुश्किल होती है | वह खड़ा और चल नहीं पाता है |

  • क्षति (Impairment) – जोड़ो से पैरो को आसानी से हिलाने में असमर्थता और पैरो पर भार सद्रीन करने में असमर्थता एक दुबर्लता है | असामान्य अनुबंधित मांसपेशियों (Contracted Muscles) को मुक्त करने के लिए ओर्थोटिक्स और सर्जरी के बिना, मोहन की क्षति (Impairment) का स्तर बढ़ सकता है, क्योंकि समय के साथ असंतुलित मांसपेशियों का संकुचन कुल्हे की अव्यवस्था और विकृत हड्डी के विकास का करण बढ़ा सकता है | मोहन को दुर्बलता (Impairment) को कम करने के लिए वर्तमान में कोई उपचार उपलब्ध नही हो सकता है |
  • विकलांगता (Disability) – मोहन का चल न पाना एक विकलांगता है | उसकी विकलांगता के स्तर में भौतिक चिकित्सा और विशेष उपकरण से सुधर किया जा सकता है | उदाहरण के लिए यदि वह एक वॉकर (Walker) का प्रयोग सिख ले, ब्रेसिस (Braces) के साथ उसके विकलांगता के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार आ सकता है |
  • अपंगता (Handicap) – मोहन का मस्तिष्क पक्षाघात यूज़ इस हद तक अभंग करती है की यह यूज़ पूर्वस्कूल और समुदाय में घर पर एक सामान्य भूमिका को पूरा करने से रोकता है | प्रारंभिक वर्षो में उनकी विकलांगता का स्तर केवल हल्का रहा है क्योंकि इसे अन्य बच्चो के साथ खेलने, परिवार के सदस्यों के साथ सामान्य रूप से समन्वय करने और पूरी तरह से पारिवारिक और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेने में सक्षम होने के लिए अच्छी तरह से सहारा दिया गया है | जैसे जैसे वह बड़ा होगा, उसकी विकलांगता बढती जाएगी, जहाँ कुछ खेल और शारीरिक गतिविधियों को उसी उम्र के बच्चो के लिए सामान्य गतिविधिया माना गया | यूज़ अपने पूर्वस्कूल कक्षा में बहुत कम बाधा हुई, यद्यपि उसे कक्षा में और कक्षा के बाहर एक गतिविधि से दूसरी गतिविधि में जाने के लिए कुछ सहायता की आवश्यकता होती थी | उचित सेवाएं और सहायता उपकरण उस सीमा को कम कर सकते है | जिस हद तक मस्तिष्क पक्षाघात मोहन को घर, स्कूल और समुदाय में अर्क सामान्य भूमिका को पूरा करने से रोकता है | सहायता विशेष उपकरण समस्या को कम करने में सहायक होते है |

सिखने की विकलांगता (Learning Disability) उदाहरण –

रिया आठ साल की है जिसे पढने में अत्यधिक कठिनाई होती है (गंभीर डिस्लेक्सिया) | उसके पास अच्छी दृष्टि और सुनने की क्षमता है और वह बुद्धि के परीक्षणों में अच्छा स्कोर करती है | वह एक अच्छे Pre-School में गई और किड्स गार्डन में उसे कई अलग-अलग विशेष पढने के कार्यक्रमों में सिखाने की कोशिश की गयी |

  • क्षति (Impairment) – जबकि किसी भी मस्तिष्क की चोट या विकृति की पहचान नहीं की गयी है | कुछ क्षति को माना जा सकता है की रिया का मस्तिष्क दृष्टि और श्रवण जानकारी को एक साथ जोड़ नहीं सकता है |
    उदाहरण के लिए ध्वनियों को चिन्हों के साथ जोड़ने में असमर्थता हो सकती है |
  • विकलांगता (Disability) – रिया के मामलो में, पढने की असमर्थता एक विकलांगता है | विभिन्न शिक्षण विधियों का उपयोग करके और जो रिया के लिए जो सबसे प्रभावी है | उसका प्रयोग कर रिया के लिए जो सबसे प्रभावी है उसका प्रयोग कर रिया की अक्षमता में सुधार लाया जा सकता है | यदि क्षति की व्यख्या हो सकती तो शिक्षण की एक ऐसी विधि का उपयोग करके विकलांगता को काफी हद तक सुधार करना संभव हो सकता है | इसमें ज्यादा कौशल की आवश्यकता नहीं होती है अर्थात यदि कठिनाई में, अक्षरों के लिए ध्वनि सीखना शामिल है, तो दृष्टि से पढने का दृष्टिकोण उसके स्तर में सुधार ला सकता है |
  • अपंगता (Handicap) – रिया ने स्कूल में अपनी कक्षा के दुसरे बच्चो के मुकाबले अपंगता का अनुभव किया है और वह तीसरी कक्षा में अनुतीर्ण हो गयी थी | जैसे-जैसे वो बड़ी हुई उसकी स्थति ज्यादा अपंगता अनुभव देने वाली हो गयी, यदि उसकी पढने में सुधर करने के लिए या उसे पढने की कठिनाइयों की भरपाई करने के लिए एक प्रभावी दृष्टिकोण नहीं पाया जाता है | यदि विकलांगता का स्तर गंभीर बना रहता है अर्थात वह कभी भी अच्छी तरह से पढना नहीं सीखती है | उस समय कम क्षति होगी यदि वह व्याख्यान टेप करना और ऑडियो टेप पर किताबे पढना सीखती है | इस तरह के तरीको का उपयोग करके, प्राथमिक विद्यालय में भी, उसकी पढने की समस्या को कम किया जा सकता है | अन्य शैक्षणिक क्षेत्रो में उसकी प्रगति में बाधा डाल कर अक्षमता उसकी विकलांगता को बढ़ाती है |

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